ये सृष्टि संतुलन और सह-अस्तित्व के कारण टिकी हुई है। इसमें हर जीव असंख्य जीवों के साथ सहअस्तित्व के कारण ही टिका हुआ है। मनुष्य शरीर में लगभग 39 ट्रिलियन (39 लाख करोड़) सूक्ष्म जीव (microorganisms) पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से बैक्टीरिया , वायरस , फंगस , और आर्किया होते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से माइक्रोबायोम (Microbiome) कहा जाता है। जब जब प्रकृति में सह-अस्तित्व के समायोजन का संतुलन बिगड़ता है, बवंडर आ जाता है। आंधी, तूफ़ान, सुनामी, भूकंप, अतिवृष्टि, भूस्खलन , हिमस्खलन ऐसे प्राकृतिक बवंडर हैं जो हमें चौंका देते हैं। हमारे शरीर में भी ऐसे बवंडर होते रहते हैं। इन शारीरिक बवंडरों को हम रक्तचाप , ज्वर , एलर्जी , इन्फ्लमेशन, आदि नामों से जानते हैं। समाज में भी जाने अनजाने ऐसे बवंडर उठते रहते हैं, उन्हें समाजशास्त्रियों ने आंदोलन , दंगे , हिंसा, युद्ध और क्रांति जैसे नाम दे रखे हैं। आखिर में जब सब संतुलित हो जाता है, सब में सामंजस्य हो जाता है , सब सहअस्तित्व को स्वीकार कर लेते हैं तो व्यक्ति , समाज और सृष्टि स्वस्थ हो जात...