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अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पहलगाम पर भारत का गुस्सा

अभी दो दिन पूर्व मैंने भी पहलगाम की दुर्घटना पर गुस्से में प्रतिक्रिया दी थी। लेकिन आज मैं शांत मन से सोच पा रहा हूँ कि विवेकपूर्ण प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए, गुस्सा एक भावुक वातावरण पैदा करता है, नकारात्मक वातावरण। लेकिन आज मैं इस पर गहराई से अपना विमर्श कर सकता हूँ। इस घटना को अंजाम देने वालों का उद्देश्य क्या था ? अगर ये मैं और आप सोच पाएं तो हम ये भी पहचान पाएंगे कि इस घटना को अंजाम देने वाले लोग कौन थे? कौन हैं वो लोग, जिन्हें इस घटना के परिणामों से लाभ होने की संभावना हो सकती है। क्या कोई कश्मीरी मुस्लिम इस से लाभान्वित हो सकता है? पिछले पांच वर्षों में कश्मीर में जैसी शांति और पर्यटन का विकास हुआ है , कश्मीरी लोगों की पर्यटन से आय में वृद्धि हुई है उससे इतना तो समझ में आता है कि पर्यटन से लाभ कमाने वाले आम कश्मीरी तो ऐसी घटना को अंजाम नहीं दे सकते जो उनकी रोजी रोटी पर खतरा पैदा कर दे। सिरफिरे ब्रैनवॉश कर दिए गए ऐसे लोग, जिनके दिमाग में ये भर दिया गया हो कि गैर मुस्लिमों की हत्या एक सबाब का काम है और ऐसा करने से इस्लाम में उन्हें जन्नत का हकदार माना जाएगा,भी जन्नत और हूरों क...

न्याय क्या और कैसे, किसके द्वारा

भारतीय संविधान की दृष्टि से “न्याय” एक मूलभूत सिद्धांत है, जो संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है: “हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए… सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए…” इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान तीन प्रकार के न्याय की गारंटी देता है: 1. सामाजिक न्याय (Social Justice): सभी को समाज में बराबरी का स्थान मिले। छुआछूत, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता आदि को समाप्त करना। कमजोर वर्गों को संरक्षण देना (जैसे आरक्षण प्रणाली) 2. आर्थिक न्याय (Economic Justice): सभी को संसाधनों तक बराबर पहुंच मिले। गरीबों को अवसर और सहायता मिलें। शोषण, बेरोजगारी और असमान संपत्ति के वितरण को रोकना। 3. राजनीतिक न्याय (Political Justice) हर नागरिक को वोट देने और चुनाव लड़ने का समान अधिकार। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता। जनतंत्र में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करना। भारतीय संविधान में न्याय सुनिश्चित करने लिए ९ प्राविधान किए गए हैं- १. मूल अधिकार (Part III): ज...