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फ़रवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म का सार

सनातन धर्म में समय समय पर सुधार के लिए इसी धर्म के अनुयायियों में से कुछ प्रबुद्ध लोगों ने अपने अनुभवों के आधार पर कुछ शिक्षाएं दीं ,  इन शिक्षाओं से प्रभावित लोगों ने एक अलग कल्ट शुरू किया जो बाद में एक नए धर्म के रूप में विकसित और प्रचलित हो गया।  भारत में सनातन धर्म में समय-समय पर सुधार लाने के लिए कई धार्मिक व्यक्तित्वों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जाति-भेद, कुप्रथाओं को दूर करने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक सुधार किए। इनमें से कुछ प्रमुख धार्मिक सुधारक निम्नलिखित हैं: 1. महावीर स्वामी (599–527 ई.पू.) जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने कर्म, अहिंसा और सत्य की शिक्षा दी। उन्होंने ईश्वर की पारंपरिक अवधारणा को चुनौती देते हुए आत्मज्ञान, मोक्ष, और आत्मा की शुद्धता पर बल दिया। महावीर स्वामी ने समाज में व्याप्त हिंसा, बलि प्रथा, और जाति-प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई। 2. गौतम बुद्ध (563–483 ई.पू.) गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की। उन्होंने अंधविश्वास, बलि-प्रथा, और जाति-व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को "अष्टांगिक मार्ग...

पुरुषों पर घरेलू हिंसा या बलात्कार के लिए क़ानून

 भारत में घरेलू हिंसा और यौन अपराधों से संबंधित अधिकांश कानूनों का फोकस महिलाओं की सुरक्षा पर है। हालांकि, यह कहना गलत होगा कि पुरुषों के लिए कोई संरक्षण या उपाय उपलब्ध नहीं है, परंतु मौजूदा कानूनों में विशेष रूप से पुरुषों को पीड़ित मानकर बनाए गए प्रावधानों की कमी है। घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में महिलाओं को सुरक्षा दी जाती है और यह महिलाओं को पुरुषों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार देता है।  भारतीय  न्याय संहिता (BNS) में घरेलू हिंसा के मामले में विशेष रूप से पुरुषों को पीड़ित मानने वाले प्रावधान का अभाव है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 अब भी महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि, घरेलू हिंसा के मामलों में पुरुषों के लिए कोई विशेष प्रावधान न होने के कारण, पुरुष BNS के अन्य प्रावधानों का सहारा लेकर अपने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 में धारा 69 और धारा 70 के अंतर्गत बलात्कार और यौन शोषण के मामले दर्ज किए जा सकते हैं, लेकिन यह विशेष रूप से महिलाओं पर होने वाले यौन अपराधों को कवर क...

तरह तरह के आवरण

दुनिया भर में हर बुरे काम को ढकने के लिए अच्छे आवरण इस्तेमाल किये जाते रहे हैं। और ये तरीका आज भी अपनाया जा रहा है.  लोगों के विश्वास को अपने हित में इस्तेमाल करके अपने अपराधों और पापों या अनैतिक कार्यों को ढकने का ये काम वे करते हैं जिन्हें हम कभी अपराधी मान ही नहीं सकते क्यों कि हमें विश्वास है कि  कोई राष्ट्रवादी भ्रष्ट नहीं हो सकता, देश के साथ गद्दारी नहीं कर सकता।  कोई धार्मिक वेशभूषा धारण करने वाला या धार्मिक प्रवचन देने वाला व्यक्ति कभी अधार्मिक, या अनैतिक कार्य नहीं कर सकता।  लेकिन ये सच नहीं है।  राष्ट्रवाद और धर्म कुछ अपराधियों के लिए केवल एक पर्दा है जिसके पीछे वे अपने अनैतिक कार्यों को छिपा लेने में सफल हो जाते हैं।  आपने बहुत सी गाड़ियों पर प्रेस, विधायक, जज, प्रशासन, जैसे स्टीकर लगे देखे होंगे, ऐसा लोग क्यों लिखते हैं क्यों कि वे लोग भी इन पर्दों के पीछे अपना वास्तविक चरित्र छिपा लेते हैं। पुलिस वाले या छोटे चोर इन स्टिकर्स को देखकर सहम जाते हैं और इन वाहनों के साथ छेड़छाड़ नहीं करते। कुछ वर्ष पहले। .....प्रदेश सरकार लिखे वाहन या मंत्री। .....प्र...

सच्ची कहानी, नायिका की जुबानी

डिस्क्लेमर:- प्रस्तुत कहानी में संयोग से किसी की जिंदगी से कोई घटनाएं या नाम , मेल खा सकती हैं, दिए गए नाम और स्थान सब असल दुनिया में हैं, लेकिन जरुरी नहीं कि ये इस कहानी में लिखे पात्रों की असल जिंदगी हो। कहानी का उद्देश्य केवल आज के उत्तर भारत के गाँवों की महिलाओं के एक पहलू पर प्रकाश डालना है।  + "मैं तब सोलह बरस की थी, दसवीं की बोर्ड की परीक्षा सर पर थी।  गाँव में अडोसी पडोसी नहीं होते, बल्कि चाची ताई, भैया भाभी होते हैं। मतलब सब एक ही खानदान के लोग होते हैं तो रिश्तेदार ही होते हैं, शहर की तरह हम यहाँ किसी के नाम या पद से नहीं , रिश्ते से एक दूसरे से सम्बोधित करते हैं। तो ऐसे ही हमारी एक चाची थीं जो उम्र में मुझ से ४ या ५ साल बड़ी थीं, उनकी शादी को साल भर ही हुआ था. बड़ी हंसमुख थीं, मेरी उनसे खूब पटती  थी, वो मुझे चिड़िया बुलाती थीं क्योंकि मैं चिड़िया की तरह हर समय चूं चूं करती फुदकती फिरती थी, हालांकि मेरे पापा मुझे गुड़िया बुलाते थे, वैसे मेरा नाम सुषमा है। चाची जी की एक बड़ी बहन थीं जिनका बेटा हरी, चाची की ही उम्र का था, और  १२वीं में पढता था और उसके भी बोर्ड की प...

to allahaabaad and back to meerut

  दसवीं के बाद जब मैं ग्यारहवीं में आया तो बालैनी में मेरे सहपाठी रहे मेरे ही गाँव के बलवान सिंह, जिनकी यादव इंटर कॉलेज में फर्स्ट डिवीज़न आयी थी, उनको भी प्रेरणा मिली कि वे भी मेरठ उसी स्कूल में पढ़ेंगे, जिसमे मैं पढ़ रहा था, एक और हमारे ही गाँव के धर्मपाल यादव, जो कि मेरे सहपाठी रह चुके थे, वे भी मेरठ के बी ए वी कॉलेज के स्टूडेंट हो गए और मेरे साथी होस्टलर भी। बलवान सिंह से मेरी दोस्ती बहुत लम्बी चली, जब तक कि अपने रिटायरमेंट से कुछ समय पहले लंग कैंसर से उसने दुनिया को अलविदा न कह दिया। लेकिन धर्मपाल तो कक्षा आठ में बालेनी में मेरा क्लास फेलो था और मेरी सबसे पहली कविता मैंने उसी पर लिखी थी , जिसमे लक्षणा शक्ति का प्रयोग करते हुए अपने पेन की चोरी का आरोप उस पर लगाया था , मेरे टीचर उस कविता का मर्म समझ गए थे और उन्होंने तलाशी में मेरा पेन धर्मपाल के बैग से बरामद कर लिया था। फिर मुझे पूछा कि क्या किया जाए , तो मैंने कहा, भूल चूक लेनी देनी, हो सकता है , गैर इरादतन ये पेन उसने अपने बैग में रख लिया हो इसलिए माफ़ किया जाए। तब हम दोस्त बन गए थे। लेकिन गाँव में एक कहावत है, बाण(आदत) वाले की...