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पहली पारी अक्टूबर २००६ में समाप्त हो जाने के बाद।  धीरे धीरे लोगों का संवेदना प्रकट करने आने वालों का सिलसिला ख़त्म हुआ। और अब हम तीन प्राणी मैं, मेरा मंझला बेटा अमित, जो उस समय IIT रूडकी से बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक्स) करने के बाद नॉएडा स्थित एक साउथ अफ्रीकन सॉफ्टवेयर कंपनी में काम कर रहा था, और सबसे छोटा बेटा क्षितिज जो डीपीएस वसुंधरा में ११वीं में पढ़ रहा था, रह गए।मैंने ड्यूटी ज्वॉइन कर ली और दो दिन में ही मुझे समझ आ गया कि सुबह कार से गाजियाबाद से मुरादाबाद और शाम को मुरादाबाद से गाजियाबाद मेरे लिए ड्राइव करना संभव नहीं है।शारीरिक थकान और आर्थिक नुक्सान ने मुझे बाध्य किया कि मैं रेलवे पास बनवा लूँ। दैनिक यात्रियों के लिए मुझे रेलवे मासिक पास का महत्त्व समझ में आ गया। लेकिन कुछ दिनों में ही मुझे (दो महीने में ही) ये व्यवस्था त्यागनी पड़ी क्यूंकि मेरे अपनी आइडेंटिटी छिपा कर द्वितीय श्रेणी के भीड़ भरे डिब्बे में रोज रोज यात्रा करना, संभव नहीं रहा. कुछ दैनिक यात्रियों ने मुझे पहचान लिया कि मैं मुरादाबाद में संयुक्त विकास आयुक्त हूँ। और ये मेरे पद की गरिमा के अनुकूल नहीं था। ये पद की गर...

Positive Thoughts, Stress Management and Personality Development

सकारात्मक सोच,  तनाव प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास  व्यक्तित्व क्या है ? प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ट है, कोई भी दो व्यक्ति एक जैसे नहीं हैं। दो व्यक्ति देखने में, डील डौल में वेशभूषा में, एक जैसे लग सकते हैं फिर भी उनके बोलचाल में, उनके लहजे में अंतर आप ढूंढ ही लेंगे।अगर कोई हूबहू किसी दुसरे व्यक्ति की नक़ल भी कर ले तो भी किसी विषय पर दो व्यक्तियों के आप विचार जानने की कोशिश करें तो उनके विचारों में, उनके ज्ञान के स्तर में, उनकी रुचियों, उनकी धारणाओं में और उनके व्यवहार में आप अंतर जरूर पाएंगे।  ये जो अंतर है ये ही प्रत्येक व्यक्ति को विशिष्ट बनाता है। हर व्यक्ति की अपनी विशिष्टता ही  उसका व्यक्तित्व है।  लेकिन क्या प्रत्येक व्यक्ति अपनी विशिष्टताओं  के बारे में जागरूक है। हमारे सामाजिक ढांचे में एक गुण या कुछ लोग इसे अवगुण भी कह सकते हैं कि हमारे माता पिता और हमारे गुरुजन भी व्यक्ति को एक बने बनाये पैटर्न के रूप में ढालना चाहते हैं, वे व्यक्ति/बच्चों की विशिष्टताओं को जानने या समझने की चेष्टा शायद ही करते हैं। उनके सामने कुछ आदर्श पहले से मौजूद ...