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युद्ध और हिंसा कैसे समाप्त हो

संसार में समस्त युद्ध समाप्त किये जा सकते हैं लेकिन वर्चस्व को सहन करने की क्षमता विकसित करना कठिन है। असंभव तो नहीं।  पति पत्नी में से एक को दूसरे का वर्चस्व स्वीकार कर लेना चाहिए।  या फिर अपने अपने वर्चस्व के एरिया निर्धारित कर लेने चाहिए। अपने एरिया से बाहर पर वर्चस्व करने की चाह से ही युद्ध होते हैं चाहे वो किसी भी देश धर्म के भूगोल या इतिहास में ढूंढ कर देख लो।  सब को अपने भले बुरे का पता है , हम दूसरों का भला करने की फर्जी ख्वाइश के चलते भी दूसरों के जीवन में दखल देने की कोशिश करते हैं जो दूसरे को बुरा लगता ही लगता है , वो मेरे ढंग से रहे, वो मेरे ही धर्म को माने मेरी ही भाषा बोले, मेरी पसंद की ही पोशाक पहने, मेरे पसंद का ही खाये। सारे झगड़ों की जड़ ये मेरी पसंद का दूसरों पर थोपना ही तो है। सारे धर्म के लोग अपनी अपनी पसंद का ही पहनावा या खान पान रखते हों , ये बिलकुल भी जरुरी नहीं क्यों कि उन का मन तो है कि वे वेस्टर्न स्टाइल में जिए लेकिन मुल्लाओं का डर , पंडितों का डर , पादरियों का डर उन्हें वैसा करने नहीं देता।  मेरे घर में झगडे बिलकुल बंद हो चुके हैं , क्योंकि...

सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया का निर्णय समलैंगिक विवाह पर

समलैंगिक विवाह पर भारत के सर्वोच्च न्यायलय ने ३-२ के बहुमत से सहमति देने से इंकार कर दिया। मैं इस फैसले का पुरजोर समर्थन करता हूँ, यद्यपि मैं किन्ही भी दो वयस्कों को बिना विवाह के साथ रहने को उनका निजी अधिकार मानता हूँ। किसी भी वयस्क युगल को साथ रहने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है, इस सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायलय पहले ही समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुका है। साथ रहने को विवाह का नाम देना क्यों जरुरी है। आजकल तो वैसे ही बहुत से युवक युवती लिवइन रिलेशनशिप में रह लेते हैं और उनके इस लिवइन रिलेशन को सर्वोच्च न्यायलय ने स्वीकार किया है। बच्चा गोद लेने के लिए भी समलैंगिक जोड़ों को अधिकार देने की याचिका भी सुना है कि रद्द कर दी गयी है। यूँ तो एकल पैरेंट को भी बच्चा गोद लेने की , विशेष परिस्थिति में अनुमति दी जाती है , लेकिन समलैंगिकों को बच्चा गोद लेने का अधिकार देने का मतलब गोद लिए जाने वाले बच्चे के साथ ये एक जबरन अन्याय होगा। क्योंकि वो समलैंगिक संबंधों को बचपन से देखेगा और उस वातावरण में उस तरह से विकसित नहीं होगा यदि वह ऐसे माँ बाप द्वारा गोद लिया जाए जो समलैंगिक नहीं हैं।...
दुनिया भर की सभ्यताओं का विकास जल स्रोतों ( नदियों, झीलों, बड़े तालाबों, और समुद्र के तटों) के आसपास हुआ है। मनुष्य के लिए जल कितना महत्वपूर्ण है, ये इसी  एक बात से स्पष्ट हो जाता है।  बिन पानी सब सून।  लेकिन इस पानी को सबसे ज्यादा  बर्बाद भी मनुष्य ही करता है। नदियों और तालाबों व् झीलों और समुद्र तटों के जल को सबसे ज्यादा प्रदूषित भी मनुष्य ही करता है।  गाँवों में कुंवों पर पनिहारियाँ लड़ा करती थीं, मुंबई जैसे महानगरों में सार्वजनिक नलो से पानी लेने के लिए लड़ते आज भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली में पानी की कमी होने पर टैंकरों से पानी की आपूर्ति के समय भी पानी की लूट के नज़ारे मिल जाते हैं।  लेकिन पानी को बर्बाद करना और प्रदूषित करना बदस्तूर जारी है। मेरे अपने गाँव में बहुत से घरों में झाड़ू नाम का यंत्र दिखाई नहीं देगा। क्योंकि उनके घर में सबमर्सिबल पम्प लगा है  जो बिजली आते ही चालू हो जाता है। उस पम्प की मदद से पानी की धार से घर की गंदगी बुहार दी जाती है , घर में भैंस आदि पशुओं को पहले कभी एक बाल्टी पानी में सावधानी से नहला दिया जाता था एक मग  की मदद स...