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अप्रैल, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

व्यापार संसार को लील रहा है

सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा मंच है। ये बड़ा इसलिए है कि यहां कोई भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा पूरा लाभ उठा सकता है और उठा रहा है। इन मंचों के संचालकों ने आत्मानुशासन के लिए कुछ रेस्ट्रिक्शन्स रखी हुई हैं लेकिन ये रेस्ट्रिक्शन्स तभी काम में लाइ जाती हैं, जब कोई इन पर आपत्ति  दर्ज कराता है।  और ये जरुरी नहीं है कि हर आपत्ति पर मंच संचालक रेस्ट्रिक्शन लागू ही करे। कई बार उनका आपत्ति करने वाले को जवाब आता है कि उनके स्टैंडर्ड्स के अनुसार कंटेंट आपत्तिजनक नहीं पाया गया।  अब ये स्टैण्डर्ड कौन बनाता है। हर देश/प्रदेश/समाज के अपने अपने स्टैंडर्ड्स होते हैं, अपने अपने सामजिक नियम और परम्पराएं होती हैं। मंच संचालक जिस देश में बैठे हैं, वे उस देश के स्टैंडर्ड्स को दुनिया भर में थोप रहे होते हैं।  ये सांस्कृतिक आक्रमण/अतिक्रमण जैसा समझिये। अमेरिका में बैठे लोग अपने स्टैंडर्ड्स सारी दुनिया पर थोप रहे हैं क्यों कि फेसबुक, ट्विटर/x , व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम सब का सञ्चालन अमेरिका से हो रहा है।  अच्छा लगता है कि हमें अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक बड़ा मंच मिल जाता है और ...

सर्वोच्च निर्णय की आलोचना तो हो सकती है लेकिन पालन करना जरुरी है

आम तौर पर जब भी किसी न्यायालय, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय से कोई निर्णय आता है तो परंपरागत रूप से सभी, और विशेषकर उच्च पदासीन लोग अपनी प्रतिक्रिया यही कहा कर देते हैं कि "हम न्यायालय के आदेश/निर्णय का सम्मान करते हैं।" लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो विकास पुरुष हैं, वे परम्पराओं को तोड़ने का साहस रखते हैं। इसलिए उन्होंने कहा," जो लोग आज इलेक्टोरल बांड्स की व्यवस्था को गलत बताकर खुश हो रहे हैं, जल्द ही पछतायेंगे। "  अब उनका ये सन्देश किस के लिए है और किस भावना से जारी किया गया है , ये तो वही जानें। लेकिन कुछ भक्त टाइप लोग इसे याचिका डालने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं / प्रशांतभूषण जैसे वकीलों, न्यायालय में निर्णय देने वाली बेंच के सदस्यों, यहाँ तक कि मुख्य न्यायाधीश को भी सम्बोधित मान रहे हैं और इंतजार कर रहे हैं कि भगवान राम के तरकश से तीर किस पर चलेगा।  मुख्य न्यायाधीश एक वक्तव्य में खुद कह चुके हैं कि जब न्यायालय कोई निर्णय जारी करता है तो वह निर्णय पब्लिक प्रॉपर्टी बन जाता है। और जनता को उस निर्णय की समीक्षा करने, उस पर अपनी राय देने का हक़ होता है। निर्णय का पालन ...