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युद्ध और हिंसा कैसे समाप्त हो

संसार में समस्त युद्ध समाप्त किये जा सकते हैं लेकिन वर्चस्व को सहन करने की क्षमता विकसित करना कठिन है। असंभव तो नहीं। 

पति पत्नी में से एक को दूसरे का वर्चस्व स्वीकार कर लेना चाहिए।  या फिर अपने अपने वर्चस्व के एरिया निर्धारित कर लेने चाहिए। अपने एरिया से बाहर पर वर्चस्व करने की चाह से ही युद्ध होते हैं चाहे वो किसी भी देश धर्म के भूगोल या इतिहास में ढूंढ कर देख लो। 

सब को अपने भले बुरे का पता है , हम दूसरों का भला करने की फर्जी ख्वाइश के चलते भी दूसरों के जीवन में दखल देने की कोशिश करते हैं जो दूसरे को बुरा लगता ही लगता है , वो मेरे ढंग से रहे, वो मेरे ही धर्म को माने मेरी ही भाषा बोले, मेरी पसंद की ही पोशाक पहने, मेरे पसंद का ही खाये। सारे झगड़ों की जड़ ये मेरी पसंद का दूसरों पर थोपना ही तो है। सारे धर्म के लोग अपनी अपनी पसंद का ही पहनावा या खान पान रखते हों , ये बिलकुल भी जरुरी नहीं क्यों कि उन का मन तो है कि वे वेस्टर्न स्टाइल में जिए लेकिन मुल्लाओं का डर , पंडितों का डर , पादरियों का डर उन्हें वैसा करने नहीं देता। 

मेरे घर में झगडे बिलकुल बंद हो चुके हैं , क्योंकि हमने अपने अपने एरिया बाँट रखे हैं , ये तुम्हारा कमरा ,ये मेरा कमरा, ये तुम्हारा बाथरूम, ये मेरा बाथ रूम, ये मेरा फ्रिज ये तुम्हारा फ्रिज , तुम अपनी पसंद का खाना बनाओ, मैं अपनी पसंद का खाना बनाऊं, कभी कभी खुद को आराम देने के लिए और पार्टनर साबित करने के लिए हम बाहर रेस्ट्रॉन्ट में खा लेते हैं, एनिवर्सरी या बर्थडे वगैरा सेलिब्रेट करने के लिए लेकिन वहां भी हमारे मीनू कार्ड अलग। बस साथ बैठ कर खा लेते हैं।  घर पर अलग अलग टेबल पर अलग अलग समय पर खाते हैं , झगडे की गुंजाइश ही नहीं। एक दूसरे के ऐसे लक्षण या कार्य को सहन करना सीख लिया है , अब मैं अपनी पत्नी को  सिगरेट न पीने की सलाह नहीं देता बल्कि उसकी फरमाइश पर सिगरेट का कार्टन ऑनलाइन मंगा देता हूँ। अब मैं स्ट्रीट डॉग्स से होने वाले खतरों/बीमारियों पर लेक्चर नहीं देता बल्कि डॉग फ़ूड के ६ बैग्स हर महीने मंगा देता हूँ। अब मैं ऑटोहीमोथेरेपी पर सवाल नहीं उठाता बल्कि हर सप्ताह खुद उसकी फरमाइश पर उसका खून निकाल कर उसी को चढ़ा देता हूँ जबकि आज भी इस अतार्किक क्रिया मानता हूँ। तो अपनी पत्नी की जिन बातों को मैं पसंद नहीं करता , उन पर भी मैं उसको सहयोग करता हूँ। वह भी मुझे पूरी फ्रीडम देती है भले ही मैं उस फ्रीडम का कोई सदुपयोग या दुरूपयोग नहीं करता। वो कहती है कि आपका मन कहीं घूम कर आने का हो तो घूम आओ , लेकिन मैं उसे अकेला छोड़ कर जाऊं तो किसके भरोसे, उसे बहुत से कारणों से मेरी जरूरत पड़ती रहती है, तो प्यार वश मैं अपनी किसी इच्छा पर संयम का हथौड़ा चला देता हूँ। 

दुनिया में अगर लोग प्यार करना सीख लें , मानवता से, छोटे मासूम बच्चों से, कमजोर वृद्धों से, अबला महिलाओं (परदे में रहने वाली महिलाएं किसी भी धर्म की हों, अबला ही तो हैं )से , तो उन पर बम बारी कैसे कर सकते हैं। लेकिन वे प्यार करना सीखे ही नहीं, वे तो नफरत करना जानते हैं। किसी को अजान बुरी लगती है , किसी को कीर्तन बुरे लगते हैं। सहनशीलता तो किसी में है ही नहीं। क्यों नहीं है सहनशीलता क्योंकि अब संसार को प्यार नहीं व्यापार संचालित कर रहा है। 

हथियार बनाने वाले उद्योगपति चाहते हैं कि उनका व्यापर फैले फूले।  वो चाहेंगे कि दुनिया भर में युद्ध होते रहें, आतंक वाद, और हिंसक अपराध होते रहें, इसके लिए वो छद्म रूप से अपनी चालें चलते रहते हैं इस लिए जब तक हथियार बनाने वाले रहेंगे, बनेंगे, बिकेंगे और युद्ध, आतंकवाद और अपराध से संसार मुक्त नहीं हो सकेगा। 

दवाइयाँ बनाने वाले या अन्य मेडिकल equipments बनाने वाली कम्पनियाँ चाहेंगी कि लोग बीमार पड़ें, दुर्घटनाएं हो, उनकी दवाइयों और उपकरणों की मांग बढे। इसके लिए वे छद्म रूप से अपना काम भी करती रहेंगे। कुछ सकारात्मक रूप से तो कुछ नकारात्मक रूप से। वे बैक्टीरिया बनाएंगी शोध के नाम पर, वे वायरस विकसित करेंगी शोध के नाम पर , फिर वो एंटी बायोटिक और एंटी वायरस दवाएं बेचेंगी। वे चिकित्सकों को घूस देने की कोशिश करेंगी , कुछ लोग लालच में भी आएंगे। वे हेल्थ चेक अप प्लान्स बेचेंगी , वे पैथोलॉजी लैब्स का जाल बिछाएँगी , वे सभी तरह के टेस्ट्स को मेडिकल प्रैक्टिसेज के प्रोटोकॉल में शामिल करवाएंगी। और चिकित्सा को इतना मंहगा कर देंगी कि आम आदमी की पहुँच से दूर हो जाएँ।

आम आदमी भी जीना चाहता है , उसके जीने की चाह को, उसके चिकित्सा पर होने वाले व्यय को पहुँच से दूर करके एक भय का वातावरण पैदा किया जाता है , इस भय को भुनाने के लिए चिकित्सा क्षेत्र , बैंकिंग सिस्टम और सरकार मिलकर लोगों को लूटने का एक नया आकर्षण पैदा करेंगे। भय दोहन के लिए बीमा कंपनियां पैदा होंगी और ये तीन दलों का संगठन (बैंक, सरकार, चिकित्सा ) तरह तरह के बीमा आपको बेचेंगे, विज्ञापनों में मृत्यु के बाद परिवार की हालत, दिखा कर कहा जाएगा कि तुम तो बिना टर्म बीमा लिए ही चले गए , ये भी न सोचा कि घर की emi , बच्चों की पढ़ाई कैसे पूरी होगी। 

इसलिए संसार को युद्ध , अपराध , हिंसा से मुक्त देखने की इच्छा कभी पूरी नहीं होगी। मैं संसार में प्यार और शान्ति का सपना देखता हूँ, जो कभी पूरा नहीं होगा। लेकिन फिर भी देखता हूँ और अपने आस पास कोशिश करता हूँ , मेरे घर में मेरे मोहल्ले में मेरे गाँव में लड़ाई न हो, हिंसा न हो, लोग प्यार से रहें। 

आप चाहें तो आप भी कर सकते हैं, कोशिश। बिना सफल होने की कामना पाले। 

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