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कृषि विपणन की भारत सरकार की नीति की घोषणा

फिर वही ढाक के तीन पात - 


हाल ही में, केंद्र सरकार ने कृषि विपणन पर एक नई राष्ट्रीय नीति का मसौदा जारी किया है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री के तरीकों में सुधार करना है। इस मसौदे में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, डिजिटल ट्रेडिंग और ई-मार्केट सिस्टम को प्रोत्साहित करने, और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत कृषि बाजार बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

प्रमुख विशेषताएं:

  • बाजार पहुंच का विस्तार: किसानों को पारंपरिक मंडियों के अलावा निजी खरीदारों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को सीधे अपनी उपज बेचने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। साथ ही, गोदामों और शीत भंडारण सुविधाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। डिजिटल ट्रेडिंग और ई-मार्केट प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और दक्षता में सुधार का लक्ष्य है।

  • सशक्त कृषि विपणन सुधार समिति का गठन: GST परिषद की तर्ज पर राज्य कृषि विपणन मंत्रियों की एक सशक्त समिति के गठन का प्रस्ताव है, जो राज्यों के बीच एकीकृत कृषि बाजार की दिशा में आम सहमति बनाने में सहायक होगी।

  • मूल्य बीमा योजना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की तर्ज पर एक मूल्य बीमा योजना का प्रस्ताव है, जो बुवाई के समय ही किसानों की आय सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

चिंताएं और प्रतिक्रियाएं:

कुछ किसान संगठनों और राज्य सरकारों ने इस मसौदा नीति पर आपत्ति जताई है। पंजाब सरकार ने इसे 2021 में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों के प्रावधानों की पुनरावृत्ति बताते हुए खारिज कर दिया है।

किसान संगठनों ने भी मसौदे की प्रतियां जलाकर विरोध प्रकट किया है, इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी है। 

आगे की राह:

सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से मसौदा नीति पर सुझाव और आपत्तियाँ मांगी हैं, ताकि इसे और अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सके। इस मसौदे में राष्ट्रिय स्तर पर एकीकृत कृषि बाजार बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

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