दुनिया भर में हर बुरे काम को ढकने के लिए अच्छे आवरण इस्तेमाल किये जाते रहे हैं। और ये तरीका आज भी अपनाया जा रहा है.
लोगों के विश्वास को अपने हित में इस्तेमाल करके अपने अपराधों और पापों या अनैतिक कार्यों को ढकने का ये काम वे करते हैं जिन्हें हम कभी अपराधी मान ही नहीं सकते क्यों कि हमें विश्वास है कि
कोई राष्ट्रवादी भ्रष्ट नहीं हो सकता, देश के साथ गद्दारी नहीं कर सकता।
कोई धार्मिक वेशभूषा धारण करने वाला या धार्मिक प्रवचन देने वाला व्यक्ति कभी अधार्मिक, या अनैतिक कार्य नहीं कर सकता।
लेकिन ये सच नहीं है। राष्ट्रवाद और धर्म कुछ अपराधियों के लिए केवल एक पर्दा है जिसके पीछे वे अपने अनैतिक कार्यों को छिपा लेने में सफल हो जाते हैं।
आपने बहुत सी गाड़ियों पर प्रेस, विधायक, जज, प्रशासन, जैसे स्टीकर लगे देखे होंगे, ऐसा लोग क्यों लिखते हैं क्यों कि वे लोग भी इन पर्दों के पीछे अपना वास्तविक चरित्र छिपा लेते हैं। पुलिस वाले या छोटे चोर इन स्टिकर्स को देखकर सहम जाते हैं और इन वाहनों के साथ छेड़छाड़ नहीं करते। कुछ वर्ष पहले। .....प्रदेश सरकार लिखे वाहन या मंत्री। .....प्रदेश सरकार की नेम प्लेट लगी कार से अवैध हथियार और नशीले पदार्थ की तस्करी का मामला प्रकाश में आया था। ये प्लेट भी परदे का ही काम कर रही थीं।
कलयुग, या कलि युग जो भी नाम दीजिये , आज के युग की सब से बड़ी त्रासदी यही है कि अब कदम कदम पर आपके हमारे विश्वास का खून हो रहा है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
किसी जमाने में आकाशवाणी से सुनी बात अकाट्य सत्य मानी जाती थी, इसी प्रकार अपनी बात की पुष्टि में लोग अखबार में छपी खबर दिखाते थे, ये विशवास कमाया था उस युग के पत्रकारों ने। वो सच बोलते थे, और सच लिखते थे। आज सच छिपाया जाता है।
किसी जमाने में किसी गेरुए वस्त्रधारी या खादी पहने व्यक्ति के भाषण/प्रवचन में लोगों की आस्था पनपती थी। आज इन भाषणों/प्रवचनों के पीछे की नीयत ढूंढने के लिए लोग altnews और factcheck पर उनके शब्दों/बयानों की जांच करते हैं.
वीडियो एडिटिंग और वौइस् एडिटिंग ने हर फोटो और वीडियो को शक के दायरे में ला दिया है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की नयी खोज का सदुपयोग तो पता नहीं लोग कब सीखेंगे, लेकिन इसका दुरूपयोग करके किसी का भी चेहरा और आवाज क्रिएट किया जा सकता है। और कभी के मर चुके हमारे आदर्श नेताओं से अश्लील बातें कहलवायी और करवाई जा सकती हैं। भले ही उस समय के फोटोग्राफी और विडिओग्राफी में एडिटिंग न हो पाती ही लेकिन आज हो सकती है ,
अब तेरी दुनिया में जी लगता नहीं ..........
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