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भारत सरकार की CAA नियमावली

भारत में राज्यों को किसी को नागरिकता प्रदान करने का अधिकार नहीं है। नागरिकता प्रदान करना भारत सरकार का अधिकार है। इसलिए ममता बनर्जी का ये कहना कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी, मूर्खतापूर्ण राजनैतिक बयानबाजी से अधिक कुछ नहीं है। भारत में कुछ पडोसी देशों से आये शरणार्थीगण को नागरिकता प्रदान करना भारत सरकार के चुनावी घोषणाओं का लंबित विषय था, जिसे उसने अब पूरा कर दिया। इसके राजनैतिक उद्देश्य कुछ भी हों लेकिन ये एक समस्या का समाधान है, इसलिए इसका स्वागत है। यद्यपि कुछ लोग दुष्प्रचार करेंगे कि ये एक संप्रदाय की नागरिकता छीनने की और पहला कदम है. लेकिन घोषित नागरिकता नियमावली केवल बाहर से आने वालों को नागरिकता देने की प्रक्रिया तय करती है न कि भारत में रह रहे भारत के पूर्व से नागरिकों के लिए। इसलिए भारतीय मुस्लिमों को ऐसे दुष्प्रचार के प्रभाव में नहीं आना चाहिए। 
भारत का संविधान धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता, इसलिए इस नियमावली/अधिनियम पर भेदभाव का आरोप भी लगेगा। अच्छा होता कि धार्मिक पहचान और कुछ देशों के नाम इस एक्ट / नियमावली में न होते और सिर्फ ये प्राविधान किया गया होता कि विदेशों के जो भी लोग अपने देश में प्रताड़ना के कारण  भारत में शरण लेने आते हैं, यदि उनके दादा/दादी/नाना/नानी भारतीय रहे हैं तो भारत उन्हें नागरिकता प्रदान करने पर विचार करेगा। 

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