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किसानों से सहानुभूति रखिये

कुछ किसानों को आंदोलन में बड़े ट्रैक्टर्स या उम्दा कारों के साथ आते देख कर उनसे ईर्ष्या करने वालों को यह भी जानना जरुरी है कि २०२१ में हुए एक सर्वे के अनुसार भारत के अधिकतर किसानों की औसत आय १०२१८ रूपये प्रति माह है यानि १२२६१६ रूपये सालाना, जबकि भारत के लोगों की कुल औसत आय 138417 रूपए सालाना है. इस प्रकार  औसत किसान की औसत आय कुल भारतीयों की औसत आय से कम है। 

क्या किसानों को समृद्ध और सुविधा संपन्न जीवन जीने का हक़ नहीं है? क्या उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मांगने का हक़ नहीं है? आप प्रोसेस्ड फ़ूड खरीदते हैं, उसका मुनाफा प्रसंस्करण उद्योग में लगे उद्योगपतियों या फिर लॉजिस्टिक सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों को होता है, किसान को क्यों नहीं होना चाहिए, दो रुपये का आलू जब चिप्स के पैकेट में बदलता है तो वह बीस रुपये का बिकता है। दस रुपये का गेहूं जब ब्रेड में बदल कर आपके पास पहुँचता है तो उसकी कीमत 50 रुपये हो जाती है। किसान और आपकी प्लेट के बीच चालीस रुपये कौन ले जाता है ? सोचिये और किसान की मांगों का समर्थन कीजिये। नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, कम से कम मंहगाई के लिए किसान को जिम्मेदार मत समझिये, आप और किसान के बीच कितने लोग हैं जो निरंतर धनी होते जा रहे हैं, वे जिम्मेदार हैं मंहगाई के लिए और वो ही असल विरोधी हैं किसानों के। आप उपभोक्ता हैं, आप तो किसान का विरोध मत कीजिये। 

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