भारत ही नहीं दुनिया भर में लोग वैज्ञानिक घटनाओं के बारे में बहुत जागरूक नहीं हैं इसलिए जो बात उनकी समझ से परे होती है, उसे वो चमत्कार बताने लगते हैं, जबकि लोगों को चमत्कार से बहकाने वाले लोग सीधे सीधे रसायन या भौतिक विज्ञान के प्रयोगों का सहारा लेकर वो चमत्कार करते हैं।
इसी प्रकार मनोरोग और मनोचिकित्सा के बारे में भी पिछड़े देशों में जानकारी और जागरूकता का अभाव पाया जाता है। किसी को मनोचिकित्सक के पास ले जाने की बात कहो तो तुरंत मरीज स्वयं या उसके घर वाले कड़ी प्रतिक्रिया देते हैं - हमें पागल समझ रखा है क्या?
जैसे हम अपने हर अंग के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाते हैं, जैसे त्वचा विशेषज्ञ, दन्त विशेषज्ञ, पेटरोग विशेषज्ञ, ई एन टी विशेषज्ञ, urologist , हृदयरोग विशेषज्ञ आदि, मष्तिस्क और स्नायुतंत्र भी हमारे शरीर का अंग है, उसमे कोई विकार आने पर हमें इनके विशेषज्ञ के पास जाना ही चाहिए।
भूत प्रेत दिखना, वहम होना, क्रोध अधिक आना, चिंताग्रस्त रहना, कानों में विचित्र आवाजे सुनाई देना जो औरों को न सुनाई देती हों, एक ही काम को बार बार करना, किसी अनहोनी की आशंका में जीना, ऊंचाई या गहराई से डर लगना आदि सभी मानसिक रोग के लक्षण हैं।
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