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एक पर्दा है नियति का, जिसे कहते हैं काश

 "काश" शब्द यूँ तो एक सामान्य शब्द है, लेकिन इसे ख़ास बना दिया, फेसबुक पर बहुतों के चहेते  एक लेखक संजय सिन्हा ने। उन्होंने एक लेखमाला अपनी पोस्ट्स के रूप में चलाई जिसमे उन्होंने अपने फेसबुक मित्रों, जिन्हे वो अपना SSFB परिवार कहते हैं, में से नित्य दो मित्रों का परिचय शेष मित्रों से कराने का एक सिलसिला शुरू किया। 

आज मुझे महसूस हो रहा है कि ये संजय सिन्हा की ऐसी ईजाद है कि हर व्यक्ति को कल, आज और कल के बीच पड़े पर्दों को को हटा कर देखने से पता चलेगा कि अगर उनके जीवन के कल, आज और कल के बीच पड़े "काश" नाम के पड़े पर्दों को हटा कर देखें तो उनके वर्तमान और उनके भविष्य के जीवन की पूरी रूपरेखा ही बदल जायेगी। 

संजय सिन्हा परिवार में एक से एक अच्छे पत्रकार, कवि, लेखक, कलाकार, विद्वान् शामिल हैं मैं उन से आग्रह करता हूँ कि वे अपने अपने काश के परदे को हटा कर कल्पना के कैनवास पर अपने बदले हुए जीवन चरित्र को उकेरने की कोशिश करें तो इस परिवार को बड़ी रोचक जानकारियां मिलेंगे जो कइयों के जीवन को प्रभावित और प्रेरित करेंगी। 

सोचिये कि काश संजय सिन्हा के भाई का आकस्मिक परलोकगमन न हुआ होता तो क्या उन्हें  SSFB परिवार को गढ़ने की आवश्यकता होती, तो फेसबुक भी होता हम सब भी अलग अलग अपनी अपनी प्रोफाइल के रूप में होते लेकिन एक साथ परस्पर जुड़े हुए न होते। 

तो काश केवल यही नहीं है कि काश ऐसा हुआ होता, काश ये भी है कि काश ऐसा न हुआ होता तो ? तो आप लोग अपने अपने काश ढूंढ सकते हैं और उस से अनेकों नई कहानियों को जन्म दे सकते हैं। चाहे आप ये लिखना शुरू करें कि काश ऐसा हुआ होता या ये कि काश ऐसा न हुआ होता , तो....(यहां हम काश के स्थान पर यदि का प्रयोग भी कर सकते हैं )

सबक सब को मिलता है, सब तरह से मिलता है।  सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की शिक्षा मिलती है। और दोनों तरह के परिणाम सकारात्मक बनाये जा सकते हैं। इसे ही हम आपदा में अवसर ढूढ़ना या क्रिएट करना कह सकते हैं। 

जैसे अगर ऐसा न हुआ होता तो हम अमुक से वंचित रह जाते। ये दो नकारात्मकताओं का सकारात्मक परिणाम है। माइनस इनटू माइनस इज  प्लस की तरह। 

तो मैं आज का अपना काश का पर्दा हटा कर कल्पना करता हूँ कि यदि मैं फेसबुक पर जबलपुर के अमित चतुर्वेदी की मित्र सूचि में न होता तो वो मुझे संजय सिन्हा फेसबुक परिवार के प्रथम मिलन समारोह में आमंत्रित  भी न करते। यदि मैं दिल्ली के नज़दीक गाजियाबाद में न रह रहा होता तो भी शायद मैं इस अनूठे परिवार से न जुड़ पाता। इस मिलन समारोह में यद्यपि सभी आमंत्रित लोग संजय सिन्हा के आकर्षण में वहां आये थे लेकिन इस का परिणाम इतना जरूर हुआ कि कुछ लोग आपस में इसी समारोह में फेसबुक मित्र बने। पहला मिलन समारोह था इसलिए लोगों की स्वभाविक झिझक ने आपस में बहुत अधिक इंटिमेसी विकसित नहीं की और कुछ लोग ही आपस में एक cohesive ग्रुप बना पाए लेकिन इस घनिष्ठ समूह ने आगे के सालाना मिलन समारोहों की पृष्ठभूमि को तैयार करने में बड़ी भूमिका अदा की.

काश पिछले से पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में भोपाल में विधान सभा चुनाव की तिथि नवम्बर माह में न पड़ी होती तो मैं वहां होने वाले संजय सिन्हा फेसबुक परिवार के मिलन समारोह में शामिल होने के लिए ट्रैन बुकिंग करा ही चुका था , या काश मेरे कोर परिवार के सदस्यों ने दिसंबर में गोवा में अलग अलग देशों से आकर मिलने का प्रोग्राम न बनाया होता तो भी मैं पिछले वर्ष भोपाल के मिलन समारोह में शामिल होता और रविंद्र बाजपेई जैसे धुरंधर पत्रकारों से घनिष्ठता कर पाता ।

यदि पिछले वर्ष लखनऊ में SSFB परिवार का मिलन समारोह न हुआ होता तो मैं बहुत से नए मित्रों से न जुड़ पाता  और न ही मुझे संजय सिन्हा ने नोटिस किया होता और न मुझे स्टेज पर आमंत्रित किया होता। स्टेज पर बढ़ते हुए मेरा फोटो उनके पास न होता और उन्होंने मेरे बारे में, अपनी काश सीरीज में मेरा फोटो सहित उल्लेख न किया होता तो मैं चुपचाप गुमनाम सा उन कई हजार फेसबुक मित्रों की तरह संजय सिन्हा की मित्र सूची में पड़ा रहता। उनके काश सीरीज का पात्र बनते ही मुझे उस परिवार के लोगों ने भी नोटिस किया और इस कारण मेरे पास नए नए मित्र अनुरोध आये , उसके बाद मैंने भी नित नए लोगों का जिक्र उस सीरीज में देखा तो उन्हें मित्र अनुरोध भेजे जो सभी स्वीकार किये गए।  इस प्रकार मेरी मित्र सूची में इज़ाफ़ा हुआ और मुझे कई विद्वानों ने प्रभावित किया।

यदि लॉक डाउन न हुआ होता तो मेरी दिनचर्या एक ढर्रे पर चल ही रही थी, सोशल डिस्टन्सिंग लागू करने से मुझे घर में रहने का अधिक अवसर मिला। घरेलू काम खुद निपटाने की आदत विकसित की, कुछ नई डिशेज बनायी, फिर भी काफी समय बचा रहा तो कुछ नई hobbies को आयाम दिया, चित्रकारी में हाथ आजमाया, गायन (फ़िल्मी गाने) में भी खुद को आजमाया जिसकी प्रेरणा अपने फेसबुक मित्रों से ही मिली। 

फेसबुक पर भी इस बीच काफी समय दे सका तो पोस्ट्स का पढ़ना और उन पर कमेंट करना भी एक शगल बन गया। इस बीच कुछ लोगों ने संजय सिन्हा के काश लेखमाला में दो दो लोगो को हाईलाइट करने से बोरियत महसूस की और उन्होंने उनसे इस सीरीज को बंद कर के पहले की तरह जीवन से जुडी लोगों की कहानियां फिर से शुरू करने की सिफारिश भी की. काश संजय सिन्हा ने वो सीरीज जारी रखी होती तो और कई लोगों की हाईलाइट होने की ख्वाइश पूरी हो जाती। तो कुछ हाइलाइटेड लोगो और हाइलाइट न हो पाए लोगों के बीच एक सीमा रेखा खिंच गयी। कुछ में ईर्ष्याभाव भी जागा हो तो आश्चर्य नहीं। 

और सबसे ताजा काश ये कि यदि मैंने उस दिन संजय सिन्हा की पोस्ट पर झुमके के किसी बिस्तर या उसके आसपास होने की बात न लिखी होती तो ? और लिख भी दी थी तो लोगों ने उसे अधिक महत्त्व नहीं दिया था, लेकिन संजय सिन्हा तो संजय सिन्हा हैं, उनकी पारखी नज़रों ने उसमे नारी की स्वतंत्रता और उसके निजी मौलिक अधिकारों का विषय ढूंढ लिया। काश उनकी नज़र में वो टिप्पणी महत्वपूर्ण  न हुई होती तो ?उन्होंने उस विषय पर मेरा नाम उल्लेख न किया होता तो ? और फिर मेरे नाम और मेरी टिप्पणी से अनजान लोगों ने (जानकार लोगों ने ट्रॉल्लिंग नहीं की, भले ही अपने  से अच्छी बुरी प्रतिक्रिया यानि सहमति/असहमति दी )उस पर ट्रॉल्लिंग न की होती तो और फिर अगले दिन संजय सिन्हा ने मेरे बचाव में आकर एक विस्तृत और उनके स्वभाव से हटकर, थोड़ा कठोर शब्दों में एक पूरी पोस्ट न लिखी होती तो? मैं बहुत से लाभों से वंचित हो जाता। मेरा आत्मविश्वास   बढ़ा, मेरी शब्दों के चयन के प्रति समझ बढ़ी, मुझे कई नए अच्छे दोस्त मिले जिन्होंने मुझे फोन करके सांत्वना दी और हताश होने से बचाया। मुझे कुछ नए मित्र अनुरोध मिले। 

जब अर्णव गोस्वामी को उसकी नकारात्मक्ता के कारण TRP बढ़ सकती है तो मेरे भी, अनावश्यक और अप्रासंगिक समझे गए कमेंट और उस पर हुई Trolling के कारण, कुछ लोगों में कुख्यात की तरह ही सही, इस परिवार में पहचान तो बन ही गयी. अब जो लोग मुझे पहले नहीं भी जानते थे वो भी राजेन्द्र राज नाम से परिचित हो गए हैं और इसके पीछे है संजय सिन्हा का समर्थन जो उन्होंने मेरे नाम के साथ अपनी पोस्ट में साहस पूर्वक दिया। तो काश सीरीज के जन्मदाता को नमन करते हुए मैं आगे भी अपने कुछ काश लिखने का साहस कर सकूंगा। आप भी अपने अपने काश लिखें। 

आज इतना ही। 

टिप्पणियाँ

  1. अच्छा लिखा भैया....

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  2. भैया आप आ गए ...🙏

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  3. बहुत ही बढ़िया 👍👌👌👍👍🙏🙏🙏🙏

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  4. एक दम सही कहा आपने।काश है तो हम सब हैं

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  5. पिता जी के अवसान पर हमारी संवेदना
    भगवान उन्हे अपने श्री चरणो मे स्थान दे,यही प्रार्थना करते है

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