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यूनिफार्म सिविल कोड बनाम हिन्दू कोड बिल

१९५५ में हिन्दू कोड बिल पारित होने से पहले के हिन्दू परिवारों में पुरुषों को बहुपत्नी रखने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। हिन्दू कोड बिल को तैयार करने में डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की बड़ी भूमिका रही थी, उन्होंने स्वयं हिन्दू धर्म में खुद पर और अनेकों महिलाओं पर हुए भेदभाव को महसूस किया था इसलिए वे इसमें बड़े बदलाव के पक्षधर थे, लेकिन हिन्दू महासभा और कांग्रेस के भी कई वरिष्ठ नेता डॉ  आंबेडकर द्वारा प्रस्तावित हिन्दू कोड बिल के विरोध में थे. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी , सरदार पटेल, इस विरोध में अधिक मुखर थे और जवाहर लाल नेहरू इस कोड के पक्ष में होते हुए भी सबको साथ लेकर चलने की कोशिश में इस कोड को थोड़ा कमजोर रखने के पक्ष में थे इस बात से नाराज डॉ आंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया। 

आज यूनिफार्म सिविल कोड की चर्चा जोर पकड़ रही है, नेहरू की ही तरह मोदी जी की भी परीक्षा है, हिन्दू कोड बिल की चर्चा ने हिन्दुओं के कमजोर वर्ग यानि महिलाओं और दलितों में नेहरू की लोकप्रियता बढ़ा दी थी, और पहले आम चुनाव में उन्हें इतना मजबूत नेता बना दिया था कि उन्होंने हिन्दू कोड बिल आसानी से पारित करा लिया था, जब कि तत्कालीन राष्ट्रपति भी इस बिल से बहुत खुश नहीं थे. अगर हाल ही में होने वाले विशेष संसद सत्र में मोदी जी यूनिफार्म सिविल कोड पारित करा लेते हैं तो २०२४ का लोक सभा चुनाव्  और उस से भी पहले कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों मोदी लहर को आप उफान पर देख पाएंगे। 

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