भारत के मतदाता अंधे और बहरे समझ लिए गए हैं। उन्हें बताया जाता है कि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है, इस परिवारवादी को भ्रष्टाचार का भी स्रोत बताया जाता है। भारत के लोग नहीं जानते कि बीजेपी में कोई नेता ऐसा भी हो सकता है, जिसके माता, पिता, बहन, भाई, पति, पत्नी आदि कोई भी रिश्तेदार राजनीती में हो, क्योंकि बीजेपी तो परिवारवाद के विरुद्ध है। भारत के लोग नहीं जानते कि इलेक्टोरल बांड की व्यवस्था ऐसी बनायी गयी है कि कोई भी कम्पनी कितना भी चंदा किसी पार्टी को दे सकती है और उसे उस पार्टी का नाम या दी गयी धनराशि प्रकट नहीं किया जाएगी। भारत के लोग नहीं जानते कि देश के एक अकेले बीजेपी दल को अन्य सभी दलों को कुल मिले चंदे से तीन गुने से भी अधिक चंदा मिलता है। और भारत के लोग ये भी नहीं जानते कि सत्ताधारियों को मिलने वाला चंदा कोई कम्पनी क्यों देती है और बदले में क्या पाती है।
कॉकरोच जनता पार्टी, युवा और लोकतंत्र में मेरा फिर जागता विश्वास काफी दिनों से मैं आज के युवाओं और उनकी समस्याओं को लेकर कुछ लिखने की सोच रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से शुरू हुए एक युवा आंदोलन ने मुझे इस विषय पर लिखने के लिए और अधिक प्रेरित किया। शायद इस विषय को देखने का मेरा नजरिया कुछ अलग है। मैंने अपने जीवन के पाँच वर्ष शिक्षक के रूप में बिताए हैं और उसके बाद लगभग 34 वर्ष प्रशासनिक सेवा में। इसलिए छात्र आंदोलनों को मैंने केवल अखबारों की खबरों के रूप में नहीं देखा। शिक्षक के रूप में छात्रों के बीच रहते हुए उनकी बेचैनी और उनके सपनों को समझने का अवसर मिला। बाद में प्रशासनिक सेवा में रहते हुए आंदोलनों का दूसरा पक्ष भी देखा—सरकार और प्रशासन के सामने खड़ी जनता, उनकी माँगें, उनका आक्रोश और कभी-कभी उस आक्रोश को नियंत्रित करने की प्रशासनिक मजबूरियाँ। किसानों के आंदोलन भी मैंने देखे हैं। किसान जब अपनी माँग लेकर सड़क पर आता है तो उसके पीछे केवल राजनीतिक विचारधारा नहीं होती। उसके पीछे उसकी जमीन, उसकी फसल, उसके परिवार और आने वाली पीढ़ी की चिंता होती है। प्रशासन के लिए वह कानून-व्यवस्थ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें