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Knowledge is One, people see it divided


भारत सहित बहुत से देशों में , ज्ञान को विभाजित करके देखने की प्रथा सी बन गयी है। आर्ट स्ट्रीम, साइंस स्ट्रीम, मैथमेटिक्स स्ट्रीम, बायो स्ट्रीम, मेडिकल साइड, इंजीनियरिंग साइड, वगैरा वगैरा नाम से बच्चों को विषय चुनने के लिए दिए जाते हैं। जब कि ज्ञान एक समुच्चय है सब का मिला जुला। लेकिन अफ़सोस हमारे देश में तो विषय भेद भी लिंग भेद और व्यवसाय भेद यहाँ तक कि आर्थिक स्तर के भेदभाव का शिकार होते हैं। व्यक्ति कितना भी मेधावी हो लेकिन अगर वो गरीब है तो वो डॉक्टर बनने या इंजिनियर बनने की सोच भी नहीं सकता। कोचिंग व्यवसाय में भी इतनी मुश्किलें हैं कि कोचिंग कराने वाले भी छात्र की आर्थिक हैसियत को ध्यान में रखकर उसे सलाह देते हैं कि वो पुलिस में सिपाही, या फ़ौज का सिपाही बनने की तैयारी करे या क्लेरिकल जॉब को अपना सपना बनाये। गाँव में रहने वाले अधिकांश युवा बड़ा सपना इसीलिए नहीं देख सकते कि उनके घरवाले आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। 

गाँवों में जो लोग दसवीं पास कर लेते हैं ( यद्यपि विषयों का चयन कक्षा ९ से ही शुरू हो जाता है और अधिकांश लड़कियों को गणित के लिए अक्षम मान कर उन्हें कक्षा ९ में गणित से दूर कर दिया जाता है और उन्हें गृह विज्ञान की और धकेल दिया जाता है। यानि उनके लिए पहले ही तय कर दिया जाता है कि वे इंजिनियर बनने का सपना न देखें). उन्हें ग्यारहवीं में पहले तो आर्ट साइड या साइंस साइड में से चयन करने को कहा जाता है, जो लोग साइंस चुनते हैं उन्हें फिर गणित या बायो ग्रुप में से किसी एक को चुनने के लिए कहा जाता है। जैसे बायो में जाने वालों को गणित की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। या गणित चयनित करने वालों को जीव विज्ञानं की जरूरत नहीं पड़ेगी। आर्ट साइड वालों को प्लांट्स में प्रकृति द्वारा की जा रही कलाकारी को परखने की जरूरत नहीं क्योंकि वे बॉटनी यानि वनस्पति शास्त्र नहीं पढ़ेंगे, वे जीव विज्ञानं में प्रकृति द्वारा प्रदत्त तितली या मयूर पंख की सुंदरता को विज्ञानं की दृष्टि से देखने से वंचित कर दिए जायेंगे।  वे या तो चित्रकारी करें या कविताएं लिखें लेकिन इस सुंदरता के रहस्य को न समझें। 

लेकिन आज मेडिकल साइंस में जो तरक्की हो रही है उसमे इंजीनियर्स का बहुत बड़ा योगदान है लेकिन भारत में इंजीनियर्स को चिकित्सा विज्ञानं के सामने खड़ा कर दिया जाता है, बताओ तुम्हे डॉक्टर बनना है या इंजिनियर। डॉक्टर डॉक्टर की जोड़ी बनाने की कोशिस की जाती है और इंजिनियर इंजिनियर को भी गठबंधन में बाँधने को अच्छा समझा जाता है।  इंजिनियर ही लेज़र टेक्नोलॉजी विकसित करता है, मिसाइल टेक्नोलॉजी का माइक्रो मॉडल तैयार करता है जो आजकल की मेडिकल साइंस में सबसे कारगर टेक्नोलॉजी हैं जो विभिन्न सर्जरी में इस्तेमाल होती हैं। 

एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर आज अमेरिका के MIT  जैसे विश्वविद्यालय में न्यूरोसाइंस विभाग में ब्रेन में संचरित होने वाली विद्युत् तरंगों  का अध्ययन और  अध्यापन कर रहा है ये जानना शायद आपको चमत्कृत करे क्योंकि आप ने तो यही सोचा होगा कि इलेक्ट्रिकल इंजिनियर तो विद्युत् विभाग में नौकरी करेगा या किसी इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रिक फैकल्टी का हिस्सा बनेगा। ज्यादा हुआ तो किसी पावर जनरेशन, या पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में नौकरी करेगा और बहुत पैसे वाला हुआ तो इलेक्ट्रिकल एप्लायंसेज बनाने की फैक्ट्री खोलेगा या ऐसे कम्पनी में नौकरी करेगा।  इंजीनियर का चिकित्सा विज्ञान से क्या मतलब। 

इस पोस्ट का  मकसद अभिभावकों को अपना दृष्टिकोण बदलने में मदद करने का है कि वे अपने पालितों को अध्ययन के लिए विषय चयन में सहायक बने,  उनकी रूचि और रुझान को समझें। सरकार से तो कोई उम्मीद न ही करें क्योंकि उनकी शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल भारत के गौरवमय इतिहास को नया स्वरुप देना और उसमे खुद को राष्ट्र और धर्म का सबसे बड़ा पहरेदार सिद्ध करना है क्यों कि भारत में तो हजारों वर्ष पहले ज्ञान की चरम उपलब्धि हो चुकी है।  आज जो कुछ भी पश्चिमी जगत विज्ञान के नाम पर अनुसन्धान का बखान करता है वो तो हमारे ऋषि मुनि हजारों वर्ष पहले ही कर चुके हैं और प्रतीकों के माध्यम से वेदों और पुराणों तथा उपनिषदों में दर्ज कर गए हैं।  हमारे देश में ज्ञान का स्तर भौतिक जगत से ऊपर उठकर अध्यात्म को छू रहा है वहां पहुँचने में पश्चिमी जगत को हजारों साल लगेंगे। 



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