आजकल कांवड़ियों के रास्ते में पड़ने वाले मार्गों पर स्थित दुकानों/रेस्तरां या भोजनालयों /ठेले वालों/खोमचे वालों आदि को दूकान के मालिकों का नाम और दूकान में काम करने वालों के नाम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के सरकारी आदेश की बड़ी चर्चा है। उत्तर प्रदेश सरकार का एक आदेश मुख्य रूप से कांवड़ियों यानि कथित हिन्दू तीर्थयात्रियों को, मुस्लिमों (कथित अपवित्र लोगों)से होने वाली शुचिता भंग की आशंका से बचाने के लिए दिया गया बताया जा रहा है। इससे किसी का तो हित हो ही रहा होगा वर्ना ऐसा आदेश क्यों लाया गया होता। या तो प्रशासनिक हित में या किसी राजनैतिक दल के हित में या फिर किसी व्यापारी वर्ग के हित में ये आदेश हुआ है। लेकिन क्या इस से देश का हित होता है? क्या इससे सामजिक सद्भाव बढ़ेगा ? क्या इससे जातीय/साम्प्रदायिक/धार्मिक एकता मजबूत होगी ? ये प्रश्न बुद्धिजीवियों के सामने उपस्थित हो गए हैं. इन पर गंभीर चिंतन किया जा सकता है, इन पर टीवी पर नयी बहसें आयोजित कराई जा सकती हैं। क्या अब अपनी दुकानों / व्यापारिक संस्थानों के मालिकों को अपने संस्थानों के बड़े बड़े साईन बोर्ड्स पर...